Saturday, April 27, 2024

MARUTI STROTR मारुति स्त्रोत्र

 भीमरूपी महारुद्रा, वज्रहनुमान मारुती |

वनारी अंजनीसूता रामदूता प्रभंजना ||१||

महाबळी प्राणदाता, सकळां उठवी बळें |
सौख्यकारी दुःखहारी, दुत वैष्णव गायका ||२||

दीनानाथा हरीरूपा, सुंदरा जगदांतरा |
पाताळदेवताहंता, भव्यसिंदूरलेपना ||३||

लोकनाथा जगन्नाथा, प्राणनाथा पुरातना |
पुण्यवंता पुण्यशीला, पावना परितोषका ||४||

ध्वजांगे उचली बाहो, आवेशें लोटला पुढें |
काळाग्नी काळरुद्राग्नी, देखतां कांपती भयें ||५||

ब्रह्मांडे माईलें नेणों, आवळे दंतपंगती |
नेत्राग्नीं चालिल्या ज्वाळा, भ्रुकुटी ताठिल्या बळें ||६||

पुच्छ ते मुरडिले माथा, किरीटी कुंडले बरीं |
सुवर्ण कटी कांसोटी, घंटा किंकिणी नागरा ||७||

ठकारे पर्वता ऐसा, नेटका सडपातळू |
चपळांग पाहतां मोठे, महाविद्युल्लतेपरी ||८||

कोटिच्या कोटि उड्डाणें, झेपावे उत्तरेकडे |
मंद्राद्रीसारिखा द्रोणू, क्रोधें उत्पाटिला बळें ||९||

आणिला मागुतीं नेला, आला गेला मनोगती |
मनासी टाकिलें मागें, गतीसी तुळणा नसे ||१०||

अणुपासोनि ब्रह्मांडाएवढा होत जातसे |
तयासी तुळणा कोठे, मेरू मंदार धाकुटे ||११||

ब्रह्मांडाभोवतें वेढें, वज्रपुच्छें करू शकें |
तयासी तुळणा कैची, ब्रह्मांडी पाहता नसे ||१२||

आरक्त देखिलें डोळा, ग्रासिलें सूर्यमंडळा |
वाढतां वाढतां वाढें, भेदिलें शून्यमंडळा ||१३||

धनधान्य पशूवृद्धि, पुत्रपौत्र समग्रही |
पावती रूपविद्यादी, स्तोत्रपाठें करूनियां ||१४||

भूतप्रेतसमंधादी, रोगव्याधी समस्तही |
नासती तूटती चिंता, आनंदे भीमदर्शनें ||१५||

हे धरा पंधरा श्लोकी, लाभली शोभली बरी |
दृढदेहो निसंदेहो, संख्या चन्द्रकळागुणें ||१६||

रामदासी अग्रगण्यू, कपिकुळासि मंडणू |
रामरूपी अंतरात्मा, दर्शनें दोष नासती ||१७||

॥ इति श्रीरामदासकृतं संकटनिरसनं मारुतिस्तोत्रं संपूर्णम् ।।

हनुमानजी की आरती | Hanuman Ji Aarti Lyrics

आरती कीजै हनुमान लला की,

दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।

जाके बल से गिरिवर कांपे,

रोग दोष जाके निकट न झांके।।


अंजनि पुत्र महाबलदायी,

सन्तन के प्रभु सदा सहाई।।

दे बीरा रघुनाथ पठाए,

लंका जारि सिया सुध लाए।।



लंका सो कोट समुद्र सी खाई,

जात पवनसुत बार न लाई ।।

लंका जारि असुर संहारे,

सियारामजी के काज संवारे ।।


लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे,

आणि संजीवन प्राण उबारे ।।

पैठी पताल तोरि जमकारे,

अहिरावण की भुजा उखारे ।।


बाएं भुजा असुर दल मारे,

दाहिने भुजा संतजन तारे ।।

सुर-नर-मुनि जन आरती उतारे,

जै जै जै हनुमान उचारे ।।



कंचन थार कपूर लौ छाई,

आरती करत अंजना माई ।।

जो हनुमानजी की आरती गावै,

बसि बैकुंठ परमपद पावै ।।


लंकविध्वंस किए रघुराई,

तुलसीदास प्रभु कीरति गाई ।।

आरती कीजै हनुमान लला की,

दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ।।


 

हनुमान चालीसा hanuman chalisa hindi lyrics pdf

 श्री हनुमान चालीसा

--------- दोहा ---------

श्रीगुरु-चरन-सरोज-रज

निज-मन-मुकुर सुधारि ।

बरनउँ रघुबर-बिमल-जस

जो दायक फल चारि ॥


बुद्धि-हीन तनु जानिकै

सुमिरौं पवनकुमार ।

बल बुधि बिद्या देहु मोहिं

हरहु कलेश बिकार ॥


--------- चौपाई ---------

जय हनुमान ज्ञान-गुण-सागर ।

जय कपीश तिहुँ लोक उजागर ॥ १ ॥


राम-दूत अतुलित-बल-धामा ।

अंजनिपुत्र - पवनसुत - नामा ॥ २ ॥


महाबीर बिक्रम बजरंगी ।

कुमति-निवार सुमति के संगी ॥ ३ ॥


कंचन-बरन बिराज सुबेसा ।

कानन कुंडल कुंचित केसा ॥ ४ ॥


हाथ बज्र अरु ध्वजा बिराजै ।

काँधे मूँज-जनेऊ छाजै ॥ ५ ॥


शंकर स्वयं केसरीनंदन ।

तेज प्रताप महा जग-बंदन ॥ ६ ॥


बिद्यावान गुणी अति चातुर ।

राम-काज करिबे को आतुर ॥ ७ ॥


प्रभु-चरित्र सुनिबे को रसिया ।

राम-लखन-सीता-मन-बसिया ॥ ८ ॥


सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा ।

बिकट रूप धरि लंक जरावा ॥ ९ ॥


भीम रूप धरि असुर सँहारे ।

रामचंद्र के काज सँवारे ॥ १० ॥


लाय सँजीवनि लखन जियाये ।

श्रीरघुबीर हरषि उर लाये ॥ ११ ॥


रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई ।

तुम मम प्रिय भरतहिं सम भाई ॥ १२ ॥


सहसबदन तुम्हरो जस गावैं ।

अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं ॥ १३ ॥


सनकादिक ब्रह्मादि मुनीशा ।

नारद सारद सहित अहीशा ॥ १४ ॥


जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते ।

कबि कोबिद कहि सकैं कहाँ ते ॥ १५ ॥


तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा ।

राम मिलाय राज-पद दीन्हा ॥ १६ ॥


तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना ।

लंकेश्वर भए सब जग जाना ॥ १७ ॥


जुग सहस्र जोजन पर भानू ।

लील्यो ताहि मधुर फल जानू ॥ १८ ॥


प्रभु-मुद्रिका मेलि मुख माहीं ।

जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं ॥ १९ ॥


दुर्गम काज जगत के जे ते ।

सुगम अनुग्रह तुम्हरे ते ते ॥ २० ॥


राम-दुआरे तुम रखवारे ।

होत न आज्ञा बिनु पैसारे ॥ २१ ॥


सब सुख लहहिं तुम्हारी शरना ।

तुम रक्षक काहू को डर ना ॥ २२ ॥


आपन तेज सम्हारो आपे ।

तीनौं लोक हाँक ते काँपे ॥ २३ ॥


भूत पिशाच निकट नहिं आवै ।

महाबीर जब नाम सुनावै ॥ २४ ॥


नासै रोग हरै सब पीरा ।

जपत निरंतर हनुमत बीरा ॥ २५ ॥


संकट तें हनुमान छुड़ावै ।

मन क्रम बचन ध्यान जो लावै ॥ २६ ॥


सब-पर राम राय-सिरताजा ।

तिन के काज सकल तुम साजा ॥ २७ ॥


और मनोरथ जो कोइ लावै ।

तासु अमित जीवन फल पावै ॥ २८ ॥


चारिउ जुग परताप तुम्हारा ।

है परसिद्ध जगत-उजियारा ॥ २९ ॥


साधु संत के तुम रखवारे ।

असुर-निकंदन राम-दुलारे ॥ ३० ॥


अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता ।

अस बर दीन्ह जानकी माता ॥ ३१ ॥


राम-रसायन तुम्हरे पासा ।

सादर हे रघुपति के दासा ॥ ३२ ॥


तुम्हरे भजन राम को पावै ।

जनम जनम के दुख बिसरावै ॥ ३३ ॥


अंत-काल रघुबर-पुर जाई ।

जहाँ जन्म हरि-भगत कहाई ॥ ३४ ॥


और देवता चित्त न धरई ।

हनुमत सेइ सर्बसुख करई ॥ ३५ ॥


संकट कटैमिटै सब पीरा ।

जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ॥ ३६ ॥


जय जय जय हनुमान गोसाईं ।

कृपा करहु गुरुदेव की नाईं ॥ ३७ ॥


यह सत बार पाठ कर जोई ।

छूटहिं बंदि महा सुख होई ॥ ३८ ॥


जो यह पढ़ै हनुमान-चलीसा ।

होय सिद्धि साखी गौरीसा ॥ ३९ ॥


तुलसीदास सदा हरि-चेरा ।

कीजै नाथ हृदय महँ डेरा ॥ ४० ॥


--------- दोहा ---------

पवनतनय संकट-हरन,

मंगल-मूरति-रूप ।

राम लखन सीता सहित,

हृदय बसहु सुर-भूप ॥


सियावर रामचंद्र की जय ।

पवनसुत हनुमान की जय ।

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Friday, April 26, 2024

UP BOARD EXAMS

 UPBOARDEXAMS.COM WELCOME YOU

यूपी बोर्ड एग्जाम की वेबसाईट में आपका स्वागत है । 


 यूपी बोर्ड कक्षा 5 से 12 तक का सम्पूर्ण हल प्राप्त करने के लिए आप इस वेबसाईट पर बने रह सकते हो । यहाँ पर आपको एम पी बोर्ड से संबंधित सामग्री भी मिलेगी । 



ambe tu hai jagdambe kali

 आरती अम्बे तू है जगदम्बे काली  जय अम्बे गौरी मैया जय श्यामा गौरी तुमको निशिदिन ध्यावत तुमको निशिदिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिवरी ॐ जय अम्बे गौर...